चालाक कछुए की कहानी | Clever Tortoise kids story hindi | kids story in hindi

 नमस्कार दोस्तों स्वागत आपका हमारे नई पोस्ट के अंदर तो दोस्तों आज भी इस पोस्ट के माध्यम से मैं आपको एक नई और मजेदार कहानी आपको इस पोस्ट के माध्यम से देने जा रहा हूं दोस्तों इस कहानी को आप पढ़ कर बहुत अच्छा लगेगा और साथ ही साथ आपको इस कहानी को पढ़कर ज्ञान भी मिलेगा तो दोस्तों मैं आपसे रिक्वेस्ट करता हूं कि इस गाने को आप शुरू से लेकर लास्ट तक पढ़ना अगर आप नई नई कहानी सुनना चाहते हैं तो आप हमारी इस वेबसाइट को ईमेल के द्वारा स्क्राइब कर लीजिए जिसे हमारी इस वेबसाइट पर नई नई पोस्ट जैसे अपलोड हो जाते हैं तब आपको ईमेल द्वारा नोटेशन भी दिया जाएगा जिससे आप हमारी इस वेबसाइट पर आकर उस कहानी को पढ़ सकते हो।


चलो दोस्तों बिना टाइम बर्बाद के हमें उस कहानी को स्टार्ट करते हैं उस गाने का नाम है दोस्तों चालाक कछुआ सही कहा दोस्तों चालाक कछुआ दोस्तोों खाने स्टार्ट करते हैं।


चालाक कछुआ

चालाक कछुए की कहानी | Clever Tortoise kids story hindi | kids story in hindi
चालाक कछुए की कहानी | Clever Tortoise kids story hindi | kids story in hindi


बहुत समय पहले की बात है। मीरापुर नाम का एक सुंदर सा गांव था।उस गांव में एक बड़ी सारी नदी थी जिसमें पानी एकदम साफ रहा करता था और उसमें कई जीव रहा करते थे। उस नदी में कछुआ बिरहा करता था। कछुआ प्रतिदिन पानी की सतह पर तैरता रहता था। जब 1 दिन बहुत ज्यादा ठंड थी तब कछुआ पानी की सतह पर तैयार रहा था और सोच रहा था कि अगर मैं किनारे पर चला जाऊं तो वहां पर आराम से धूप में बैठकर मजा ले सकता हूं क्योंकि आज धूप भी बहुत अच्छे से निकली है। कछुआ यह सब बातें सोच रहा था और फिर देखने लगा की आस पास कोई है तो नहीं फिर कछुआ देखता है यहां पर कोई नहीं है तो मैं चलकर किनारे पर जाकर बैठ जाता हूं और वहां पर अच्छी-अच्छी धूप सेक लूंगा।


जब कछुआ किनारे पर चला जाता है और वहां पर जाकर अपनी आंखों को बंद कर कर आराम करने लग जाता है तब ही पास में झाड़ियों में एक भेड़िया छुपा रहता है और भेड़िया सोचता है कि आज तो मेरे लिए खुद ही खाना आ गया है मैं इस  कछुए को खाकर अपना पेट भर लूंगा। तभी भेड़िया धीरे-धीरे कछुए की ओर जाने लग जाता है और कछुए को अपने मुंह में दाम लेता है लेकिन कछुए का जो कवच है वह काफी कठोर होता है जिस वजह से भेड़िया उसको नहीं खा पाता है और भेड़िया परेशान हो जाता है उसको अपने मुंह में लिए हुए तब कछुआ कहता है अरे भेड़िया भैया तुम तो मुझे नहीं खा पा रहे हो।


तुम्हारी ऐसी दशा मुझसे देखी नहीं जाती तब कहता है कि तुम ही बताओ कि मैं तुम्हें कैसे खाऊं। तब चालाक कछुआ कहता है कि मैं काफी कठोर हो गया हूं अगर आप मुझे पानी में थोड़ी देर तक डाल दोगे तो उसके बाद में मैं थोड़ा मुलायम हो जाऊंगा और उसके बाद में आप मुझे खा सकते हो चालाक कछुए की बात सुनकर भेड़िया सोचा कि मैं से पानी में डाल देता हूं और भेड़िया उसे पानी में डाल देता है और कछुआ पानी में तैरता रहता है जैसे ही भेड़िया का ध्यान दूसरी ओर चला जाता है तब कछुआ जल्दी से पानी के बीच में चला जाता है और फिर कछुए भेड़िए से कहता है कि खाओ मुझे खाओ अब खा कर दिखाओ।


तो दोस्तों जैसा कि देख सकते हो आप कछुए ने अपनी बड़ी चालाकी के साथ अपनी जान को बचा लिया भेड़िए से तो कछुए ने अपनी चालाकी का सबूत दिया है।


शिक्षा

इस कहानी से हमें शिक्षा मिलते हैं कि हमें हमेशा चतुराई से काम करना चाहिए चाहे कैसा भी संभव हो हमें चालाकी से उस समय पर विजय प्राप्त करनी चाहिए।

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