आलसी कौआ की कहानी | Lazy Crow Ki Kahani | Kids Story In Hindi

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दोस्तों आज किस पोस्ट के माध्यम से मैं आपको एक नई और मजेदार कहानी सुनाने जा रहा हूं जिसको पढ़ कर दोस्तों आपको बहुत अच्छा लगेगा। दोस्तों उस कहानी का नाम है आलसी कौआ

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आलसी कौआ की कहानी


आलसी कौआ की कहानी | Lazy Crow Ki Kahani | Kids Story In Hindi
आलसी कौआ की कहानी | Lazy Crow Ki Kahani | Kids Story In Hindi


बहुत समय पहले की बात है जो किसी दूर जंगल में स्थित एक नीम का पेड़ था तब उस नीम के पेड़ के ऊपर एक कौवा और गिलहरी दोनों रहते थे दोनों में काफी अच्छी तरीके से मित्रता थी। दोनों हर रोज सुबह खाना खाने की खोज में जाते और शाम को नीम के पेड़ पर वापस आ जाते थे। दोनों खाने की समस्या से काफी परेशान रहते थे दोनों खाने की समस्या से छुटकारा पाने की वजह सोचते पर कोई उपाय नहीं मिल पाता था।


जब 1 दिन गीलहरी और कोए ने अपनी खेती करने की योजना बनाई और गिलहरी और कौवा ने यह निश्चय किया कि जो भी खेती होगी वह उस खेती का आधा भाग आपस में बांट लेंगे।अगले दिन जब गिलहरी ने कौवे से कहा कि चलो खेत में चलते हैं और वहां पर खेती का काम स्टार्ट करते हैं और खेत को जोत आते हैं। मगर कोवा ने बहाना बना दिया कि तुम खेत में चलो मैं भी आता हूं।

गिलहरी खेत जोत आती है। नीम के पेड़ की डाल पर बैठा हुआ कौवा कांव-कांव करता रहता है। गिलहरी के पूछने पर कौवे ने जवाब दिया कि आज मुझे बुखार हो गया था जिस वजह से मैं नहीं आ पाया।अगले दिन फिर से गिलहरी ने कौवे से खेत में गेहूं बोने के लिए कहा। कोआ ने फिर से बहाना बनाया और कहां की तुम खेत चलो मैं भी आता हूं।


गिलहरी अकेले जाकर खेत में गेहूं वह कर आ जाती है। और कौवा फिर भी वहां पर नहीं पहुंचता है और गिलहरी के पूछने पर कोवे ने फिर से झूठ बोल दिया कि उसके दोस्त वहां पर आए थे जिस वजह से उनकी खातिरदारी में वह लग रहा था और वह नहीं आ पाया।

गिलहरी के द्वारा उगाई हुई गेहूं की फसल अच्छी तरह से उग आती है  खेत में घास होते ही देख गिलहरी ने कौवे से खेत की निराई करने के लिए कहा कौवे ने फिर बहाना बनाकर कह दिया कि तुम खेत तक चलो मैं भी आता हूं गिलहरी खेत की निराई कराती है और कौवा पेड़ पर ही बैठा रहता है।


और इस तरह समय बीत जाता है। और फसल पक जाती है। गिलहरी ने कोवे से कहा कि चलो फसल काट लेते हैं।लेकिन आलसी कवि ने कहा कि तुम अपनी आधी फसल काट लो मेरे सिर में दर्द है मैं कल काट लूंगा। गिलहरी अपनी आधी फसल काट कर घर ले आती है।

उसी रात बहुत तेज वर्षा हो जाती है और कौवे की सारी फसल पानी में बह जाती है कौवा कांव-कांव करता रह जाता है उसे अपने आलस का फल भी मिल जाता है। इस प्रकार काव्य की सारी फसल बर्बाद हो जाती है गिलहरी को अपने काम का फल मिल गया और कौवे को अपने आलस का फल मिल गया।


शिक्षा

इस कहानी से में शिक्षा मिलती है कि हमें कभी भी आदत नहीं करना चाहिए क्योंकि आलस का फल सदैव बुरा ही होता है।

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