हाथी और सियार की कहानी | Elephant Kids Story In Hindi

 स्वागत है दोस्तों आपकी नई कहानी के अंदर तो दोस्तों आज मैं आपके सामने एक नई कहानी लेकर आ गया हूं जिसका ने को दोस्तों आप पढ़ोगे तो आपको काफी अच्छा लगेगा नॉलेज मिलेगी तो दोस्तों उसका नी का नाम है हाथी और सियार की कहानी जी हां दोस्तों हाथी और सियार की कहानी मैं आप को देने जा रहा हूं जिसको आप पढ़ सकते हो तो चलो बिना इस देरी के इस गाने को प्रारंभ करते हैं।


हाथी और सियार की कहानी


चंदनपुर नामक जंगल में एक हाथी रहता था वह हाथी काफी बड़ा था और वह सारा दिन इधर-उधर घूमता रहता था और वह खाना भी खा लिया करता था। जब एक दिन घूमते घूमते दूसरे किसी जंगल में से एक सियार उस जंगल में आ गया और उससे यार ने हाथी को देख लिया।


सियार सोचा कि मुझे इतना बड़ा हाथी मिल गया है अगर मैं इसको मार डालूंगा तो कई दिनों तक मैं इससे अपना पेट भर सकता हूं। तो सियार हाथी के पास जाता है और हाथी से कहता है कि हाथी भाई हाथी भाई हमारी जंगल में कोई भी बड़ा और समझदार जानवर राजा नहीं है इस वजह से मैं आपको हमारी जंगल में ले जाने के लिए आया हूं और मैं आपको वहां पर राजा बना दूंगा।


हाथी राजा बनने की खुशी में इतना पागल हो गया कि वह सियार के पीछे पीछे चला गया सियार उसे अपनी जंगल में ले जाता है और वहां पर उसे एक तालाब में जाने को कहता है वह तालाब दलदली तालाब था जिसमें जाकर हाथी फस जाता है।


तो वह सियार से कहता है कि तुम मुझे इस दलदल में लेकरक्यों आ गए हो तुमने मुझे इस दलदल में फंसा दिया अब मुझे बाहर निकालो नहीं मैं मर जाऊंगा तब सियार जोर-जोर से हंसने लग जाता है और हाथी से कहता है कि मैं तुम्हें यहां पर मारने के लिए ही लाया हूं ना कि तुम्हें बचाने के लिए अगर तुम मर जाओगी तो मैं तुम्हें कई दिनों तक खा सकूंगा क्योंकि तुम्हारा काफी बड़ा शरीर है जिस वजह से मैं कई दिनों तक पेट भर के खाना खा सकूंगा और कुछ ही देर बाद में हाथी वहां पर मर जाता है और सियार उसे खाने के लिए हाथी के ऊपर चढ़ जाता है।


लेकिन शायद यह भूल जाता है कि वह भी उस दलदल में ही है और वह हाथी के ऊपर चढ़ जाता है। हाथी धीरे-धीरे नीचे जाना प्रारंभ हो जाता है और वह सीआरवी धीरे-धीरे नीचे जाने लग जाता है और वह भी मर जाता है इस प्रकार से दोनों की दोनों ही वहां पर मर जाते हैं।


शिक्षा

इस कहानी से में शिक्षा मिलते हैं कि हमें दूसरों को कभी भी बुरा नहीं करना चाहिए क्योंकि दूसरों को बुरा करने से हमारा भी बुरा हो सकता है अर्थात जो दूसरों के लिए गड्ढा खोदता है वह उस गड्ढे में वह भी एक दिन गिर ही जाता है।

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