एकता की शक्ति (दुगनी खिलौने) | Kids Story In Hindi

 नमस्कार दोस्तों स्वागत आपका है। दोस्तों आज की कहानी बहुत ही इंटरेस्टिंग होने वाली है इस कहानी में आपको संदेश मिलेगा इस कहानी का नाम है एकता की शक्ति इस कहानी के बारे में आपको छोटी सी डिटेल बता देता हूं इसमें 2 बच्चे होते हैं जो आपस में खिलौने की वजह से झगड़ते रहते हैं तो यह कहानी दो बच्चों के आधार पर ही लिखी गई है।

इस कहानी को शुरू से लेकर लास्ट तक पढ़ना चलो कहानी को स्टार्ट करते हैं।



एकता की शक्ति (दुगनी खिलौने)


बहुत समय पहले की बात है । मीरापुर नाम का एक शहर था। उस शहर में घनश्याम नाम के आदमी के 2 बच्चे थे हम दो बच्चों के नाम चिंटू और पिंकी है। दोनों बच्चों काफी शरारती हैं।यह दोनों बच्चे हमेशा आपस में झगड़ते रहते थे कि मेरे पास तुम्हारे से ज्यादा खिलौने है मेरे पास तुम्हारे से ज्यादा खिलौने है कभी चिंटू कहता कि मेरे पास ज्यादा खिलौने हैं तो कभी पिंकी कहती कि मेरे पास ज्यादा खिलौने ऐसा कहते कहते भी दोनों आपस में हमेशा लड़ते ही रहती थी।


जब एक दिन दूर से उनके दादाजी उनके घर पर आए तब उनके दादाजी ने चिंटू और पिंकी को झगड़ते हुए देखा जब चिंटू और पिंकी ने अपने दादाजी को आते हुए देखा तो उन्होंने झगड़ना बंद कर दिया और दादा जी की ओर देखने लगी कि दादा जी आप हमारे लिए खिलौने लेकर आए क्योंकि उनके दादाजी उनके लिए बहुत सारे खिलौने लेकर आए थे जो उनके दोनों हाथों में खिलौने से भरा हुआ बैग था।

चिंटू और पिंकी उन दोनों बहनों को दे दिया कि कहा कि यह मेरा बैग है यह मेरा खिलौना है ऐसा कह कर दोनों खिलौने वाले बक्से को यानी बैग को लेकर चले गए। अगले दिन फिर से वह झगड़ा करने लगेगी मेरे पास तुमसे ज्यादा क्यों नहीं है मेरे पास तुमसे ज्यादा खिलौने यह देखकर दादाजी सोचेंगे तो फिर से झगड़ा करने लगी दादाजी सोचते है कि यह अपने आप ही समझ जाएंगे लेकिन ऐसा नहीं हुआ काफी दिन निकल गए चिंटू और पिंकी झगड़ते रहे तब दादाजी बच्चों के कमरे मैं आएऔर बच्चों से कहने लगे कि मैं तुम्हें जादू दिखाता हूं मैं तुम्हारे खिलौनों को दुगना कर दूंगा लेकिन तुम्हें अपनी आंखों को बंद करना होगा ऐसा क्या कर चिंटू और पिंकी दोनों अपनी आंखों को बंद कर लेते हैं और दादाजी उन दोनों के खिलौनों को एक जगह रख देते हैं और फिर दादा जी कहते हैं कि और तुम्हारी आंख खोलो।

वे दोनों अपनी आंखें खोल लेते हैं और चिल्ला कर कहते हैं कि दादाजी। बच्चे कहते हैं कि दादा जी आपने हमारे दोनों के खिलौनों को एक जगह क्यों कर दिया। तो दादा जी कहते हैं यह बच्चे एकता में काफी शक्ति होती है।पहले तुम दोनों के पास अलग-अलग खिलौने थे लेकिन जब तुमने एक जगह भी तो नहीं करती है तो ज्यादा खिलौने हो गए हैं यानी कि हमें हमेशा घुल मिलकर रहना चाहिए एकता के साथ रहना चाहिए क्योंकि एकता में हमेशा शक्ति होती है दादा जी की बातों को वे दोनों बच्चे समझ गए और फिर कभी भी उन दोनों ने झगड़ा नहीं किया।


शिक्षा

एकता में काफी शक्ति होती है हमें हमेशा सभी से मिलजुल कर रहना चाहिए।

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